क्यों 20 जनवरी को ही अमेरिका के नए राष्ट्रपति लेते हैं शपथ? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

joe biden america president

लंबे समय तक हुए बवाल के बाद अब आखिरकार दुनिया के सबसे पॉवरफुल देश अमेरिका को अपना अगला राष्ट्रपति मिलने जा रहा हैं। जो बाइडेन आज यानी 20 जनवरी को ही अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। क्योंकि भारत का समय अमेरिका से 10 घंटे 30 मिनट आगे है। इस वजह से जो  बाइडेन का शपथ ग्रहण समारोह भारतीय समय के अनुसार रात 10:30 बजे होगा।

अमेरिका में पिछले साल के नवंबर महीने में चुनाव हुए थे। इसमें जो बाइडेन, डोनाल्ड ट्रंप को हराने में कामयाब हुए। आज यानी 20 जनवरी को जो बाइडेन अमेरिका के नए राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। अमेरिका में इस दिन को इनॉग्रेशन डे कहा जाता है।

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20 जनवरी को ही क्यों शपथ लेते हैं राष्ट्रपति?

वहीं अमेरिका में जिस तारीख को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटि्ंग होती है, उसे इलेक्शन डे कहते है। अमेरिका में नवंबर में ही चुनाव होते हैं। एक से 8 नवंबर के बीच ये खत्म हो जाते हैं और फिर चुनावों को नतीजे आते है। इसके बाद 20 जनवरी को नए राष्ट्रपति शपथ लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों अमेरिका में 20 जनवरी को ही राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह होता है? आइए इसके बारे में आपको बता देते हैं…

दरअसल, अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के मुताबिक नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए 20 जनवरी की ही तारीख तय की गई है। चुनाव खत्म होने के बाद करीब ढाई महीने बाद नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होता है। सबसे पहले 20 जनवरी को 1937 में फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर शपथ ली थी। इस दौरान वो दूसरी बार राष्ट्रपति बने थे।

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वैसे आप ये भी सोच रहे होंगे कि आखिर क्यों राष्ट्रपति चुनाव में जीतने के ढाई महीनों बाद शपथ दिलाई जाती है। दरअसल, इसकी पीछे ये वजह होती है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को अपनी टीम तैयार करनी होती है। जिसमें कैबिनेट से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति तक शामिल होती है।

पहले 4 मार्च थी तय तारीख

लेकिन 1937 से पहले तो नए राष्ट्रपति को शपथ मार्च में दिलाई जाती थीं यानी चुनाव खत्म होने के चार महीनों बाद। पहले 4 मार्च को अमेरिका के नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होता है। ये तारीख क्यों बदली गई, इसके बारे में भी आपको बता देते हैं…

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क्यों इसे बदला गया?

पहले 4 मार्च की तारीख इसलिए तय थीं, क्योंकि जो राष्ट्रपति अपना पद छोड़ने वाला होता था, उसको सारी प्रक्रियाएं पूरी करने, तमाम दस्तावेजों को तैयार करने और नए राष्ट्रपति को सारी जिम्मेदारियां सौंप देने के लिए पूरा समय मिले। लेकिन फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट लगातार दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तो उनको जिम्मेदारियां सौंपने की कोई जरूरत नहीं थीं।

वैसे जब रूजवेल्ट का पहला कार्यकाल था, तब से ही पद सौंपने की अवधि को घटाने पर विचार होने लगा। क्योंकि इन चार महीनों के दौरान जो राष्ट्रपति रहता है, उसके पास ज्यादा अधिकार और समय नहीं होता था, तो वो नीतिगत काम और फैसले नहीं कर सकता था। औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए ये ज्यादा समय लगने लगा। इसके बाद अमेरिकी संविधान में 20वां संशोधन किया गया और इसकी अवधि को घटाया गया।

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23 जनवरी 1933 को अमेरिकी संविधान में 20वां संशोधन मंजूर हुआ और राष्ट्रपति पद सौंपने का इंतेजार दो महीने कम हो गया। इसके अलावा इस व्यवस्था के मुताबिक नई कांग्रेस की पहली बैठक के लिए 3 जनवरी की तारीख भी तय की गई।

लीप ईयर में होते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव

आपको ये भी बता दें कि राष्ट्रपति पद का निर्वाचन लीप ईयर पर ही होता है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए मध्यावधि चुनाव नहीं कराए जाते। अगर किसी भी वजह से राष्ट्रपति का पद खाली हो जाए, तो जो तत्काल उपराष्ट्रपति होता है वो ही राष्ट्रपति बन जाता है और उस कार्यकाल में जितना भी समय बचा होता है, उतने समय तक वो राष्ट्रपति रहता है। इसके बाद अगली बार चुनाव लीप ईयर में ही होते है।

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