कोरोना वायरस के लिए चीन-अमेरिका में से कौन जिम्मेदार? जानिए, दुनियाभर के अलग-अलग देश किस पर लगा रहे आरोप

दिसंबर के महीने में कोरोना वायरस ने चीन के वुहान शहर में दस्तक दी थी. अब देखते ही देखते ये दुनिया के अधिकतर देशों पर कहर बरपा रहा है. इटली, अमेरिका और स्पेन जैसे देशों में कोरोना ने तबाही मचा रखी हैं. कोरोना वायरस को लेकर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं. अमेरिका इस वायरस के पीछे चीन को जिम्मेदार ठहरा रहा था, तो वहीं रूस समेत कुछ अन्य देशों का आरोप है कि ये वायरस अमेरिका का हथियार है.

इजरायल ने लगाया चीन पर आरोप

कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई है. चीन, सऊदी अरब, सीरिया, रूस जैसे देशों का दावा है कि कोरोना के पीछे अमेरिका की साजिश है, तो वहीं इजरायल और अमेरिका जैसे देशों का आरोप है कि कोरोना वायरस को चीन ने अपनी लैब में बनाया है और जिसे वो एक जैविक हथियार (Biological Weapon) के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है.

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दरअसल, चीन के वुहान शहर में इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल बायोसेफ्टी लैब है. ये लैब हुनान सी-फूड मार्केत से 32 किलो ही दूर है. इसी मार्केट से कोरोना वायरस फैलने का दावा किया जा रहा है. चीन की इस लैब में दूसरे वायरस जैसे इबोला, निपास, सॉर्स पर भी रिसर्च किया जाता है. लैब के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उन्होनें माइक्रोस्कोप में एक अजीबो-गरीब वायरस देखा, जो अभी से पहले कभी भी नहीं देखा गया. कहा जा रहा था कि ये चमगादड़ में मौजूद वायरस जैसा हो सकता है.

वैज्ञानिक वायरस को देखकर इसलिए भी आश्चर्यचकित है कि ये वायरस सार्स (SARS) से काफी मिलता-जुलता है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि साल 2002-2003 में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (SARS) नाम की एक बीमारी आईं थी, जिससे करीब 26 देश प्रभावित हुए थे. दुनियाभर में इस वायरस से लाखों लोगों बीमार हुए, जबकि 700 लोगों की जान गईं. कहा गया था SARS भी कोरोना की तरह छूने और संक्रमित शख्स के खांसने और छींकने से ही फैलता था.

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चीन पर आरोप लगाया गया कि उसने इस वायरस के बारे में दुनिया से छिपाया था. इजरायल का आरोप है कि कोरोना का वुहान से शुरू होना कोई इत्तेफाक नहीं है. ये चीन की लैब से ही लीक हुआ है. वुहान की लैब में सेना के साथ खतरनाक वायरस पर शोध किया जाता है. यही दावा अमेरिका भी कर रहा है. अमेरिका सीनेटर टॉम कॉटन ने संभावना जताते हुए कहा कोरोना को चीन का जैविक हथियार बताया. 

इन देशों ने अमेरिका पर उठाए सवाल

वहीं दूसरी तरफ चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे देश इसका आरोप अमेरिका पर मढ़ रहे हैं. ये देश दावा कर रहे है कि ये वायरस अमेरिका के ट्रेड वॉर का हिस्सा है और इससे पहले भी अमेरिका इस तरह के हथियारों का प्रयोग कर चुका हैं. रूस के दावे के मुताबिक कोरोना से अमेरिका चीन की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना चाहता है और इसके लिए वो इस बायोलॉजिकल वेपन का इस्तेमाल कर रहा है.

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आपको बता दें कि पहले 1980 के शीत युद्ध के दौरान भी रूस अमेरिका को HIV का जिम्मेदार ठहरा चुका हैं. वहीं इसके अलावा सऊदी अरब के एक अखबार ने मिस्त्र का उदाहरण दिया है. अखबार के मुताबिक जब मिस्त्र ने इस बात की घोषणा की कि वो कुछ समय बाद चिकन उत्पादन पर आत्मनिर्भर हो जाएगा और उसको अमेरिका-फ्रांस जैसे देशों से चिकन आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो इसके बाद अचानक वहां पर बर्ड फ्लू फैल गया और मिस्त्र का चिकन उद्योग तबाह हो गया.

अखबार में ये भी बताया गया कि साल 2003 में जब चीन ने ये ऐलान किया कि उसके पास दुनिया का सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा का भंडार है, तो इस घोषणा के बाद वहां पर अचनाक से सार्स (SARS) फैल गया.

रूस, सऊदी अरब के अलावा सीरिया ने भी यही कहा है कि अमेरिका ने कोरोना वायरस का इस्तेमाल चीन की अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए किया. सीरिया ने कहा कि इससे पहले अमेरिका इबोल, स्वाइन फ्लू, जीका, बर्ड फ्लू समेत कई जैविक हथियारों का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ कर चुका हैं.

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हालांकि वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख शी झेंगली ने लैब से संक्रमण फैलने वाले आरोपों का खंडन किया है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि शी झेंगली को अमेरिका की एकेडमी ऑफ माइक्रोबॉयोलाजी से फेलोशिप मिली हुई है और वो कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी अमेरिका और इजरायल जैसे देश इसी लैब पर कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने का आरोप लगा रहे हैं.