क्या है वो पांच बड़ी मांगें, जिनको लेकर सड़कों पर हैं किसान? क्यों केंद्र सरकार उनको मनाने में हुई अब तक नाकाम?

kisan protest

किसान हमारे अन्नदाता होते हैं, जो हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। लेकिन यही अन्नदाता अपनी कुछ मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए है। पंजाब से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की तरफ आने की कोशिश कर रहे हैं। ये किसान बीते महीनों से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं और यही इनके प्रदर्शन का कारण भी है।

किसानों का ‘दिल्ली चलो’ अभियान जारी

पंजाब की 31 किसान यूनियनों ने 26 और 27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया था। गुरुवार को किसान दिल्ली की ओर आगे बढ़े, इस दौरान उन्हें रोकने के लिए भारी पुलिस बल की भी तैनाती की गई। बीते दिन पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ। किसान लगातार आक्रामक रवैया अपनाए हुए है और वो दिल्ली की तरफ रुख कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने बॉर्डर को सील कर दिया है और मेट्रो सेवा पर भी इसका असर पड़ रहा है। गुरुवार की तरह आज भी मेट्रो सेवा बाधित रहेगी। दिल्ली से एनसीआर तो मेट्रो का सफर यात्री कर पाएंगे, लेकिन एनसीआर से दिल्ली का नहीं।

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किसानों का ये प्रदर्शन लगातार बढ़ता ही चला रहा है। तो आइए आपको बताते हैं कि आखिर किसानों की वो पांच मांगें क्या है, जिसको लेकर वो ये प्रदर्शन कर रहे हैं और क्यों सरकार की किसानों को मनाने की तमाम कोशिशों नाकाम हो रही हैं…?

पहली मांग- कृषि कानून वापस हो

किसानों की सबसे बड़ी मांग यही है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि सुधार कानून को वापस लिया जाए। किसान यूनियनों का कहना है कि ये कानून किसानों के समर्थन में नहीं है और इससे कृषि के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही जमाखोरों और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचेगा। किसान यूनियनों का ऐसा मानना है कि इन कानूनों को लागू किए जाने से उनका आने वाला कल मुसीबतों से भरा होगा।

दूसरी मांग- MSP पर लिखित आश्वासन दिया जाए

किसानों की दूसरी मांग जो सबसे बड़ी है वो न्यूनतम समर्थन बिल यानी MSP को लेकर है। किसान यूनियनों का कहना है बिल के तौर पर एक लिखित आश्वासन दिया जाए कि आगे आने वाले समय में केंद्र पूल के लिए MSP और पारंपरिक खाद्य अनाज खरीद प्रणाली जारी रहेगी।

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तीसरी मांग- बिजली बिल संशोधन खत्म किया जाए

किसानों की एक मांग ये भी है कि बिजली बिल संशोधन को खत्म किया जाए। यूनियनों का कहना है कि अगर ये बिल कानून बन जाता है, तो उनको फ्री में बिजली की सुविधा नहीं मिलेगी। उनके अनुसार संशोधन बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देगा और पंजाब में किसानों को दी जाने वाली फ्री बिजली सुविधा बंद करा देगा।

चौथी मांग- पराली जलाने पर सजा और जुर्माना खत्म हो

उनकी चौथी मांग पराली जलाने से जुड़ी है। किसानों ने ये मांग की है कि खेतों में पराली जलाने वाले सजा और जुर्माने को खत्म किया जाए। बता दें कि पराली जलाने वाले किसानों को 5 साल की सजा और एक करोड़ रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है।

पांचवीं मांग- गिरफ्तार किसानों को रिहा किया जाए

इसके अलावा किसान यूनियवों की पांचवीं मांग है कि धान की पराली जलाने के आरोप में जिन किसानों को गिरफ्तार किया गया, उनको तत्काल रिहा किया जाए।

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3 दिसंबर को फिर होगी बातचीत

अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को मनाने में अब तक कामयाब नहीं हो पाई। किसान यूनियन नेताओं, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच दो बार सीधी तौर पर बातचीत हुई है, लेकिन इनका कोई भी नतीजा सामने नहीं आया। अब किसानों से 3 दिसंबर को भी बातचीत की जाएगी।

केंद्र ये स्पष्ट कर चुकी हैं कि कृषि कानून को वापस नहीं लिया जा सकता। हालांकि, केंद्र ने किसान यूनियनों की मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी बनाए जाने पर सहमति जताई है। किसानों की इन 31 में से 30 यूनियन ने रेलवे प्लेटफॉर्म, स्टेशन और पटरियों से घेराबंदी हटावने के लिए केंद्र सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होनें कहा है कि अगर 10 दिसंबर तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तो वो दोबारा से रेलवे ट्रैक्स को बाधित करेंगे। देखना ये होगा कि आखिर किसानों का ये प्रदर्शन आगे क्या रूप लेता है? क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को मनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं…?

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