भारत और चीन के सैनिकों के बीच खौल रहा है गुस्सा, फिर भी 40 साल से क्यूं नहीं चली गोली ?

आजकल भारत और चीन के सैनिकों में बॉर्डर पर झड़प की खबरें सामने आ रहीं हैं. पिछले हफ्ते में दो बार झड़प होने से दोनों पक्षों के सैनिकों में चोटें भी आयीं हैं.

india and china border disputes

आजकल भारत और चीन के सैनिकों में बॉर्डर पर झड़प की खबरें सामने आ रहीं हैं. पिछले हफ्ते में दो बार झड़प होने से दोनों पक्षों के सैनिकों में चोटें भी आयीं हैं. इनमें से एक झड़प इस महीने लद्दाख में हुई तो दूसरी सिक्किम से सटे बॉर्डर पर हुई. लेकिन दोनों देशों ने एक दूसरे के बीच ज्यादा तनाव नहीं बढ़ने दिया और और मामले को फ्लैग मीटिंग के जरिये सुलझा लिया. बता दें दोनों देशों में अक्सर बॉर्डर पर हाथपाई और पत्थरबाजी की खबरें सामने आती रहती हैं. लेकिन 4 दशकों में अभी तक दोनों गुटों में से किसी एक ने भी गोली नहीं चलाई है.

दोनों देशों ने दिया संयम का परिचय

काफी हैरानी की बात ये है कि दोनों देशों के बीच काफी तनाव है लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के सैनिकों ने परिपक्वता का परिचय दिया है. जहां दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर रोज गोलीबारी की खबरें आती रहती हैं, वहीं भारतीय और चीनी सैनिक खूनखराबे जैसी हिंसा में विश्वास नहीं रखते. इसका एक उदाहरण 2017 में डोकलाम में 73 दिन चले भारत और चीनी सैनिकों का लंबा गतिरोध था जिसके बावजूद दोनों तरफ से बंदूके नहीं उठायी गयीं. इस बारे में 2017 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनैशनल इकनॉमिक फोरम में पीएम मोदी ने भी जिक्र किया था. उन्होंने कहा था, ‘यह सही है कि हमारा चीन के साथ सीमा विवाद है. लेकिन पिछले 40 सालों में सीमा विवाद की वजह से एक भी गोली नहीं चली है. यह हमारी परिपक्वता को दिखाता है.’ बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं ने आखिरी बार 1975 में गोली चलाई थी.

फ्लैग मीटिंग के जरिये निपटा लिया जाता है विवाद

सीमा विवाद सैन्य टकराव में इसके लिए दोनों देशों की तरफ से पुख्ता व्यवस्था की गई है. दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति में फ्लैग मीटिंग के जरिये विवाद को निपटा लिया जाता है. इसमें ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी हिस्सा लेते हैं. ये फ्लैग मीटिंग नियमित होती रहती है. बॉर्डर मैनेजमेंट के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला चलता रहता है. इसके अलावा सैनिकों ने अपने लिए कुछ नियम भी बना रखे हैं. दोनों ही देशों की तरफ से अग्रिम पंक्ति में तैनात सैनिकों के पास आम तौर पर हथियार नहीं होते.

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क्यों होती रहती है हाथापाई ?

लेकिन दोनों देशों के बीच झड़प और हाथापाई आम है. ऐसा लगता है कि कुश्ती चल रही है. अब चीनी सैनिक पत्थरबाजी भी करने लगे हैं. हाल ही में लद्दाख में 5 मई को भी यही हुआ था. दोनों पक्षों में इसलिए भी भिड़ंत हैं क्योंकि दोनों के बीच सीमा को लेकर अस्पष्टता है. जब दोनों पक्ष संयोग से एक ही जगह पर गश्त करते हैं तो टकराव की नौबत आ जाती है. चीनी सैनिक अक्सर भारतीय इलाकों में आकर वहां पेंटिंग कर देते हैं कि इलाका उनका है.

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अहम है पंचशील समझौता

बता दें इसके पीछे 1954 में हुआ पंचशील समझौते की भी खासियत है. हालांकि 1962 में चीन ने इस समझौते की धज्जियां उड़ा दी. लेकिन दोनों देश के बीच जो इस समय बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम है उसकी बुनियाद इसी समझौते में है. पंचशील समझौते में ये 5 बातें थीं :

1-एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान

2- एक दूसरे पर आक्रामक न होना

3-एक दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना

4-समान और परस्पर लाभकारी संबंध

5- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

फिलहाल चीन की कुटिलता को लेकर भारत को सावधान रहना पड़ेगा.