रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वे चेहरे जिनके कंधो पर टिका है राममंदिर की भव्यता और सुन्दरता का जिम्मा

राम मंदिर निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाने की जिम्मेदारी राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के कुल इन 15 सदस्यों पर है. आइये जानें कौन हैं वो चेहरे जिनके कन्धों पर इस कार्य को पूरा करवाने का है जिम्मा.

अयोध्या में रामजन्मभूमि पर राममंदिर के शिलान्यास होने में बस चंद दिनों का वक्त है. 5 अगस्त को भारत एक नया इतिहास बनायेगा. इस भूमि पूजन में पीएम मोदी भी शरीक होंगे. जिसके बाद अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का काम रफ़्तार पकड़ लेगा. इस विशालकाय मंदिर की कायाकल्प का जिम्मा मल्टीनेशनल कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को सौंपा गया गया है. लेकिन इसके अलावा भी राम मंदिर निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाने की जिम्मेदारी राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के कुल इन 15 सदस्यों पर है. आइये जानें कौन हैं वो चेहरे जिनके कन्धों पर इस कार्य को पूरा करवाने का है जिम्मा.

महंत नृत्य गोपाल दास

महंत नृत्य गोपाल दास श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं. वे अयोध्या आंदोलन का हिस्सा भी रहे हैं. जिस वजह से उन्हें राम मंदिर के निर्माण का कार्य संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले कार्य लगातार उनकी अगुवाई में होते रहे हैं. साथ ही उन्हीं ने काफी लंबे समय से राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा भी एकत्र कराया है. हालांकि इन पर आरोप है कि ये बाबरी विध्वंस में शामिल थे. जिसके चलते इनके खिलाफ लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा है.

चंपत राय

ये विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अन्तराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. चंपत राय के कन्धों पर भी राम मंदिर निर्माण का जिम्मा है. साथ ही ये श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव भी हैं. राम मंदिर से जुड़ी जानकारी ये अक्सर मीडिया में देते रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई के दौरान भी अक्सर चंपत राय वहां मौजूद रहते थे. साथ ही उन्होंने वीएचपी की राम मंदिर के राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन खड़ा करने में अहम भूमिका अदा की थी. बता दें कि ये वीएचपी की सक्रियता का ही नतीजा था कि बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण को अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल किया था.

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नृपेंद्र मिश्रा

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को पूरा करवाने में सबसे अहम किरदार नृपेंद्र मिश्रा निभा रहे हैं. और ऐसा इसलिए क्योंकि वे राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. साल 2014 में मोदी ने पीएम की कमान संभालते ही मिश्रा को अपना प्रधान सचिव नियुक्त कर दिया था. और ये इनकी इमानदारी और काबिलियत का ही नतीजा है कि वे बीजेपी के दूसरे कार्यकाल में भी इस कुर्सी पर विराजमान हैं. इन्होने पीएम मोदी की कई योजना जैसे उज्जवला, घर घर शौचालय को हकीकत में बदलने का काम किया है. यूपी काडर के आईएएस नृपेंद्र मिश्रा 1967 बैच के अधिकारी रहे हैं. उन्होंने कभी मुलायम सिंह यादव तो कभी कल्याण सिंह सरकार में प्रमुख सचिव की भूमिका निभाई है.

के. परशरण

उम्र के दशक पार करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. पराशरण 92 बरस के हैं. अयोध्या मामले में अकाट्य दलीलें रखने वाले पराशरण को भारतीय वकालत का ‘भीष्म पितामह’ यूं ही नहीं कहा जाता. रामलला के पक्ष में फैसला आने का काफी हद तक श्रेय उन्हें भी जाता है. इससे पहले ये सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के भी वकील रह चुके हैं. उन्हें भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है और इसकी बानगी न्यायालय में भी देखने को मिली. राम मंदिर के अस्तित्व के मामले में उन्होंने स्कन्ध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके काफी मजबूत दलील दी थी.

महंत दिनेंद्र दास

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के 9 प्रमुख सदस्यों में से निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास भी हैं. वे निर्मोही अखाड़े की ओर से काफी लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ते रहे थे. 10 साल की उम्र में वो मठिया के आश्रम के महंत बन गए थे. जिसके बाद बीए की पढ़ाई करने के लिए वे अयोध्या में रहने लगे. यहां रहते रहते ही वे निर्माही अखाड़ा से जुड़ गए. 1992 में निर्मोही अखाड़ा के नागा बने, उसके बाद 1993 में पंच और उपसरपंच बना दिए गए.

देव गिरि जी महाराज

महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज का जन्म हुआ था. मौजूदा समय में ये श्रीरामजन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य के साथ-साथ कोषाध्यक्ष भी हैं. राममंदिर निर्माण के लिए कितना चंदा इक्कट्ठा हुआ, कितना निवेश किया गया, इन सब का सारा हिसाब किताब देव गिरी जी महाराज रखते हैं. वे रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का देश विदेश में प्रवचन करते हैं. साथ ही वे महाराष्ट्र के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हैं.

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बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र

बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र अयोध्या राज परिवार के वंशज है. वे रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और समाजसेवी हैं. साथ ही श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्थायी सदस्य हैं. बीते अपने कुछ सालों में वे राजनीति से भी जुड़े रहे हैं. 2009 में बसपा के टिकट पर वे लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे थे. लेकिन चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया था. फ़िलहाल उनको रामजन्मभूमि के रिसीवर की जिम्मेदारी ट्रस्ट गठन के बाद कमिश्नर एमपी अग्रवाल ने सौंपी थीं.

डॉ. अनिल कुमार मिश्र

अयोध्या के होम्योपैथिक डॉक्टर और आरएसएस के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह डॉ. अनिल कुमार मिश्र भी श्री रामजन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्थायी सदस्य हैं. वे शहर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं. राम मंदिर के आंदोलन वे विनय कटियार के साथ जुड़े थे. इसके बाद वे आरएसएस से जुड़ गए.

प्रसन्नतीर्थ जी महाराज

कर्नाटक के पेजावर मठ के जगतगुरू मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज भी ट्रस्ट के सदस्य हैं. वे कर्नाटक के मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं. इससे पहले मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ थे जिनका निधन हो गया था.

कामेश्वर चौपाल

कामेश्वर चौपाल ट्रस्ट के दलित सदस्य के तौर पर नामित हैं. उन्होंने 1989 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान के समय हुए शिलान्यास की पहली नींव रखी थी. इसके अलावा बीजेपी के टिकट पर वे बिहार के रोसड़ा और सुपौल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक आरएसएस ने उन्हें कारसेवक का भी दर्जा दिया है.

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युगपुरुष परमानंद

युगपुरुष परमानंद जी महाराज भी ट्रस्ट के सदस्य हैं. उनका पूरा नाम युगपुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज है. सन 2000 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र के विश्व शांति शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था. उत्तर और दक्षिण अमेरिका ,कनाडा ,इंग्लैंड ,न्यूजीलैंड ,यूरोप और एशिया के माध्यम से दुनिया भर में वे प्रवचन दे चुके हैं. वे शिक्षाओं और वेदांत तकनीकों के आधार पर 150 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं जिनका कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया है.

वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज

vasudevanand saraswati

बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज भी ट्रस्ट के सदस्यों में एक हैं. इनके शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर काफी विवाद भी रह चुका है. इनकी पदवी को लेकर द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने हाईकोर्ट में केस दाखिल किया था.

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि

इसके अलावा इस ट्रस्ट में यूपी सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा को शामिल किया गया है. इनका मंदिर निर्माण में काफी अहम रोल है. मंदिर की सुन्दरता को निखारने का जिम्मा इन्हीं दो लोगों को दिया है. अयोध्या की भूमि अनुज कुमार झा के अंडर है क्योंकि वे जिलाधिकारी हैं. वहीं 1987 बैच के आईएएस अफसर अवनीश अवस्थी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा शामिल हैं. यूपी सरकार का राममंदिर निर्माण में अहम रोल है. मंदिर ही नहीं बल्कि अयोध्या को सुंदर बनाने और सजाने की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों लोगों के हाथ में है. अनुज कुमार झा अयोध्या के जिलाधिकारी होने के नाते सारे भूमि उन्हीं के अधीन आती है. वहीं, 1987 बैच के आईएएस अफसर अवनीश अवस्थी यूपी के धर्मार्थ कार्य, पर्यटन, सूचना और गृह विभाग के प्रमुख सचिव पद के इंचार्ज है. ये दोनों अधिकारी अयोध्या में ऐतिहासिक दीपोत्सव के आयोजन से लेकर भगवान राम की मूर्ति की स्थापना, प्रस्तावित मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन के निर्धारण समेत कई बड़े फैसलों में भूमिका निभा चुके हैं.