भारत-चीन के बीच तनाव अभी बरकरार, ठंड में विवाद सुलझने के आसार कम! जानिए कहां फंसा हुआ है फेंच?

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अप्रैल-मई के महीने से ही भारत और चीन के बीच तनातनी का माहौल बना हुई है। दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन अब तक कोई भी परिणाम उसका निकलता हुआ नजर नहीं आ रहा। बीच-बीच में ऐसी खबरें भी आई कि दोनों देशों में सैनिकों के पीछे हटाने को लेकर सहमति बन गई, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।

दोनों देशों में गतिरोध जारी

अब ये माना जा रहा है कि ठंड के मौसम में दोनों देशों के बीच तनाव ऐसे ही जारी रहेगा। पूर्वी लद्दाख पर LAC से सैनिकों के पीछे हटाने के लिए कमाडंर स्तरीय की हुई 8 बैठकों के बाद भी दोनों देशों में गतिरोध बढ़ा हुआ है। 7 महीने से जारी गतिरोध अभी भी बरकरार है। अब ये माना जा रहा है कि ठंड के भारत-चीन की सेनाएं ऐसे ही डटी रहेगीं और पीछे नहीं हटेगीं।

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इन वजहों से नहीं सुलझ रहा विवाद

एक अखबार को सूत्र ने ये दावा किया है कि दोनों देशों के बीच सहमति से पीछे हटने की प्रक्रिया के हो रही बातचीत फिलहाल अगली किसी जानकारी तक रुक गई है। 9वीं दौर की बातचीत के लिए भी चीन ने कोई तारीख नहीं बताई। जानकारी ये मिली है कि अब भी चीन इस बात पर अड़ा है कि सेना पीछे हटाने के प्रस्‍ताव को पैंगोंग झील-चूशूल इलाके के दक्षिणी किनारे से लागू किया जाए। बता दें कि ये वही जगह है जहां पर भारतीय सेना के जवानों ने ड्रैगन को मात देकर बढ़त बना ली थी।

वहीं भारत ने चीन को साफ तौर पर ये स्पष्ट किया है कि सैनिकों की वापसी की शुरुआत पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे से की जाए। जिस जगह पर चीनी सेना ने फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक आठ किलोमीटर इलाके पर मई से ही कब्‍जा किया हुआ है। यही भारत और चीन के बीच यही विवाद की वजह बना हुआ है। इसके अलावा फिंगर एरिया से पीछे हटने की दूरी के लिए भी मतभेद भारत-चीन की सेनाओं के बीच बने हुए है। साथ ही रणनीतिक रूप से बेहद अहम देपसांग के मैदानी इलाके को लेकर भी सवाल बरकरार है।

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सैनिकों के पीछे हटने की बात आई थी सामने

7 महीनों से देपसांग में भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग रुकी हुई है। दोनों देश के बीच 8वें दौर की बातचीत के बाद ये कहा जा रहा था कि भारत-चीन सहमत हो गए हैं कि वो सैनिक, टैंक, तोप और आर्म्ड व्हीकल को पैंगोंग ढील से पीछे हटा लेंगे। लेकिन अब तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

भारत-चीन ने इस इलाके में करीब 50-50 हजार सैनिकों को तैनात किया गया है। 15 हजार फीट ऊंचाई पर सैनिकों के लिए ये समय काफी मुश्किलों से भरा होगा। इलाके में तापमान पहले ही माइनस में पहुंच गया है। सिर्फ भारत ही नहीं चीन के सैनिकों को भी इस मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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