सुषमा स्वराज: जानिए ‘भारतीयों की मसीहा लेडी’ की अनसुनी कहानी

वैलेंटाइन डे यानि 14 फरवरी के दिन जन्मी सुषमा स्वराज का आज जन्मदिन है. भाजपा की कद्दावर नेता और व्यक्तित्व की धनी सुषमा अपने फैसलों को लेकर काफी अटल स्वभाव की थी.

Sushma-Swaraj

वैलेंटाइन डे यानि 14 फरवरी के दिन जन्मी सुषमा स्वराज का आज जन्मदिन है. भाजपा की कद्दावर नेता और व्यक्तित्व की धनी सुषमा अपने फैसलों को लेकर काफी अटल स्वभाव की थी. अगर उन्हें भारतीयों की मसीहा का टाईटल दिया, तो बिल्कुल भी अतिश्योक्ति नहीं होगी. जब जब किसी दूसरे देश में भारतीयों पर विपदा आई, सुषमा बतौर विदेश मंत्री उनके लिए ढाल बनकर खड़ी रहीं. उन्होंने सैन्य ऑपरेशन चला के मुश्किल में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी करवाई. बता दें कि राजनीति की सबसे कुशल नेता सुषमा ने पिछले साल यानि 6 अगस्त 2019 की तारीख को अपनी अंतिम सांस ली.

2014 में सौंपा गया था विदेश मंत्री का पद

साल 2014 में सुषमा को विदेशमंत्री का पद सौंपा गया था. पद संभालने के बाद से विदेश में रह रहे भारतीयों की हरसंभव मदद करने वाली सुषमा ही थीं. यमन में जब हाउथी विद्रोहियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी तो हजारों भारतीय इस जंग के बीच में फंस गए. जंग लगातार बढ़ती जा रही थी और सऊदी अरब की सेना लगातार यमन में बम गिरा रही थी. इसी बीच यमन में फंसे भारतीयों ने विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मदद की गुहार लगाई. इसमें साढ़े पांच हज़ार लोगों की जान सुषमा के चलते बच पाई थी. इसमें से 4640 भारतीय थे.

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मासूम गीता को लाया गया वापिस

सुषमा के विदेश मंत्री रहते हुए 15 साल पहले भटककर सरहद पार पाकिस्‍तान पहुंच गई 8 साल की मासूम गीता को भारत लाया जा सका. गीता जब भारत लौटी तब उसकी उम्र 23 साल हो चुकी थी. गीता भारत आने के बाद सबसे पहले विदेशमंत्री सुषमा स्‍वराज से मिली. कुछ ऐसा ही कोलकाता की जूडिथ डिसूजा केस में भी हुआ. जूडिथ को 9 जून को काबुल से अगवा कर लिया गया था. सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के बाद अफगान अधिकारियों ने जूडिथ की रिहाई सुनिश्‍चित करवाई.

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सुषमा की हुई है लव मैरिज

सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल का प्रेम विवाह हुआ था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के दिलों में  प्रेम के बीज पड़ने कॉलेज के दिनों से शुरू हो गए थे. सुषमा शर्मा और स्वराज कौशल की मुलाकात पंजाब यूनिवर्सिटी के चंडीगढ़ के लॉ डिपार्टमेंट में हुई थी. दोनों 13 जुलाई 1975 को शादी के बंधन में बंधे थे. दोनों को अपने परिवारवालों को मनाने में काफी पापड़ बेलने पड़े थे. पर अंत में वे मान गए.