‘खेल महाशक्ति बनने के लिए हमें भविष्य का चैंपियन तैयार करना होगा’

Sports Minister Kiren Rijiju, Khelo India Movement

विश्व पटल पर हर क्षेत्र में नाम कमाने वाले हमारे देश भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां हर राज्य, शहर और गली,कस्बे में आपको प्रतिभाशाली और काफी प्रभावशाली बच्चे मिल जाएंगे। जिन्हें बस संवारने की जरुरत होती है और वे आगे चलकर देश का नाम भी रोशन करते है। लेकिन छोटे शहरों या फिर गांव-कस्बे में रहने वाले कई प्रतिभाशाली बच्चे संसाधन और उचित ट्रेनिंग के अभाव में अपने पथ से विमुख हो जाते हैं। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए खेल मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों से जमीनी स्तर से बड़ी संख्या में प्रतिभाओं को तलाशने के लिए अपने स्तर पर सक्रिय रुप से ‘खेलो इंडिया’ के अंतर्गत आने वाले खेलों को आयोजित करने की सलाह दी है।

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‘हमें भविष्य का चैंपियन तैयार करना होगा’

खेल मंत्री किरन रिजिजू का कहना है कि खेलो इंडिया योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली वार्षिक प्रतियोगिताओं, जैसे कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स एवं यूनिवर्सिटी गेम्स ने सभी राज्यों से खेल प्रतिभाओं की पहचान करने में मदद की है। यह हालांकि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने खेलो इंडिया योजना की आम परिषद की बैठक के दौरान यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, जो राज्य पहले से ही वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं का संचालन करते हैं, वे खेलो इंडिया योजना के साथ जुड़ सकते हैं और केंद्र इन आयोजनों के संचालन में उनकी मदद करेगा।’ उन्होंने कहा कि भारत को खेल महाशक्ति बनाने के लिए, हमें 5-10 साल की उम्र में प्रतिभा को पहचानना होगा और भविष्य का चैंपियन बनने के लिए तैयार करना होगा।

खेलमंत्री ने कहा कि ओलंपिक के लिए एथलीट तैयार करने में कम से कम 8 साल लगते हैं, अगर हम इससे अधिक उम्र की प्रतिभा की पहचान करते हैं तो ओलंपिक के लिए उनकी संभावनाएं सीमित होगी। रिजिजू की अध्यक्षता में हुई खेलो इंडिया योजना की आम परिषद की पहली बैठक में खेल सचिव रवि मितल, भारतीय खेल प्राधिकरण के महासचिव संदीप प्रधान और खेल मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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जानें क्या है खेलो इंडिया कार्यक्रम?

किरन रिजिजू ने 5 क्षेत्रों पूर्व पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और पूर्वोत्तर से प्रतिभा तलाशने के लिए 5 क्षेत्रीय प्रतिभा खोज समिति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिभाओं को राज्य सरकार या साइ केंद्रों में प्रशिक्षित किया जा सकता है। हमें प्रतिभाओं की पहचान करने में राज्य सरकारों से सलाह की आवश्यकता हैं।

बता दें, खेलों इण्डिया कार्यक्रम के अंतर्गत तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, मुक्केबाजी, फुटबॉल, जिमनास्टिक्स, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, शूटिंग, तैराकी, वॉलीबॉल, भारोत्तोलन और कुश्ती सहित कुल 16 खेलों को शामिल किया गया है। खेलो इंडिया का मुख्य उद्देश्य ऐसे खिलाड़ियों की खोज कर उन्हें विश्व स्तर तक ले जाना है जो किसी खेल में निपुण होने के बाद भी आर्थिक तंगी के कारण खेल में अपना करियर नहीं बना पाते।

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