राजस्थान: बागी विधायक नहीं लौटे तो क्षेत्र में करना होगा विरोध का सामना!

Pratap Singh Khachariyawas,Rajasthan Political Crisis

राजस्थान में सियासी पारा चरम पर है, प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार बचाने की कोशिशों में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने पिछले दिनों सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया था, सीएम गहलोत ने सचिन पायलट पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। दूसरी ओर सचिन पायलट ने अभी तक कांग्रेस पार्टी के खिलाफ किसी भी तरह की कोई बयानबाजी नही की है, वे शुरु से ही राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को निशाने पर ले रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पायलट पर नरम रुख अपना रही है। इसी बीच राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने उम्मीद जताई है कि बागी विधायक पार्टी आलाकमान से मिलकर वापस लौटेंगे।

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बढ़ गई है विधायकों की कीमत

परिवहन मंत्री ने कहा कि यदि बागी विधायक जनता का मान सम्मान समझते हैं तो वापस जरुर आएंगे। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो खुद के विधानसभा क्षेत्र में विरोध का सामना करना पड़ेगा। वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि विधानसभा सत्र की तारीख तय होने से पहले विधायकों की कीमत 10-15 करोड़ रुपये से लेकर 20-25 करोड़ रुपये तक थी।

लेकिन विधानसभा सत्र की तारीख तय होते ही विधायकों का भाव आसमान छू गया है और मुंहमांगा पैसा देने की बात सामने आ रही है। गहलोत ने कथित तौर पर राजस्थान के सियासी उठापटक के मास्टरमाइंड केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का इस्तीफा न होने पर अचरज जताई है।

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बीजेपी पर खरीद-फरोख्त के आरोप

बता दें, राजस्थान में जारी उठा-पटक के बीच अशोक गहलोत खेमे के विधायक जयपुर से जैसलमेर के सूर्यागढ़ पहुंच गए है। ये सभी विधायक 13 जुलाई से ही जयपुर के फेयरमेंट होटल में ठहरे थे। बताया जा रहा है कि विधानसभा सत्र शुरु होने तक सभी विधायक जैसलमेर में ही रहेंगे। खबरों के मुताबिक सचिन पायलट भी अपने समर्थक विधायकों के साथ 14 अगस्त से शुरु होने वाले विधानसभा सत्र में हिस्सा ले सकते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुरु से ही बीजेपी पर राजस्थान सरकार को अस्थिर करने और विधायकों के खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते आ रहे हैं।

विधायको को जैसलमेर शिफ्ट करने से पहले सीएम गहलोत ने एकबार फिर से बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर जैसे ही राज्यपाल महोदय का आदेश जारी हुआ, उसके  बाद से ही विधायकों, उनके परिवारवालों, उनके मिलनेवालों को धमकी और दबाव भरे फोन आने लगे थे। उन्होंने कहा कि विधायकों को मानसिक रुप से परेशान कर दिया गया था।

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