ममता ने ‘दाहिने हाथ’ कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी ने दिया इस्तीफा! क्या बंगाल की राजनीति में लाएंगे भूचाल?

SHUBENDU ADHIKARI RESIGN AS MINISTER

बंगाल विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त बचा हुआ है। लेकिन वहां की राजनीति अभी से गर्मा गई है। जहां इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। वहीं चुनाव से पहले TMC को एक बहुत बड़ा झटका लग गया है। कई दिनों से पार्टी से बगावती रूख अपनाने वाले शुभेंदु अधिकारी ने परिवहन मंंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।

कल दिया था इस पद से इस्तीफा

कई दिनों से ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही थीं कि शुभेंदु पार्टी से नाराज चल रहे हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते है। यही नहीं इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को शुभेंदु ने हुगली रिवर ब्रिज कमीशन चैयरमैन के पद से भी इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उन्होनें अब तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन दो दिनों में इन दो इस्तीफों से उन्होनें बड़े संकेत जरूर दे दिए हैं।

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नाराजगी की क्या है वजह?

ममता बनर्जी का दाहिना हाथ कहे जाने वाले की शुभेंदु की पार्टी से नाराजगी की कई वजहें बताई जा रही है। ममता बनर्जी अपनी पार्टी में दूसरे नेताओं के मुकाबले अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ज्यादा तवज्जो दे रही है, जो शुभेंदु को पंसद नहीं आ रहा। साथ ही ये भी बताया जा रहा है कि प्रशांत किशोर जिस तरह से बंगाल में संगठनात्मक बदलाव, उससे वो नाखुश खुश हैं।

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कैसे TMC की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं शुभेंदु?

दो बार संसद रहे शुभेंदु अधिकारी का संबंध एक ताकतवर राजनीतिक परिवार से है। अपने क्षेत्र पूर्वी मिदनापुर के अलावा उनकी पकड़ आस-पास के जिलों में भी है। उनका असर 65 सीटों पर बताया जाता हैं। जैसे ही शुभेंदु का नाम आता है, वैसे ही 2007 में TMC के नंदीग्राम आंदोलन का जिक्र भी होता है। उनको नंदीग्राम आंदोलन का आर्किटेक्ट कहा जाता है। ममता बनर्ती की अगुवाई में साल 2007 में इस आंदोलन की वजह से ही बंगाल में दशकों से चले आ रहे लेफ्ट के राज को खत्म कर दिया था। आंदोलन का खाका शुभेंदु ने तैयार किया था। शुभेंदु के भाई दिब्येंदु तमलुक लोकसभा सदस्य हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे सौमेंदु कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष हैं। उनके पिता सिसिर अधिकारी TMC के सबसे वरिष्ठ लोकसभा सदस्य हैं, जो कांथी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जाहिर सी बात है कि अगर शुभेंदु चुनावों से पहले TMC का साथ छोड़ देते हैं, तो पार्टी के लिए ये बहुत बड़ा झटका होगा। वहीं शुभेंदु अधिकारी के बीजेपी में शामिल होने की खबरें भी सामने आ रही है। लेकिन अब तक इन सब अटकलों पर उन्होनें चुप्पी साधी हुई है। देखना होगा कि शुभेंदु अधिकारी आगे कौन-सा कदम उठाते और चुनाव पर इसका क्या असर पड़ता है…?

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