Gandhi Jayanti 2020: 13 साल की उम्र में हो गई थी गांधी जी की शादी, बापू की जयंती पर जानें उनसे जुड़ी कुछ खास बातें…

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 151वीं जयंती है. 2 अक्टूबर 1869 को महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में हुआ. गांधी जी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. उनके पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थी. महात्मा गांधी के पिता अंग्रेजों के राज में पोरबंदर और गुजरात में रियासत के दीवान थे. गांधी जी तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. उनका सत्य और अहिंसा से भरा जीवन अपनी मां से प्रेरित था. गांधी जी के जीवन में धर्म कि विशेष प्रभाव था.

महात्मा गांधी की शिक्षा

गांधी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर से की. इसके बाद उनके पिता का ट्रांसफर राजकोट हो गया था, जिसकी वजह से उन्होनें अपने आगे की पढ़ाई वहीं से की. 1887 में महात्मा गांधी ने राजकोट के हाई स्कूल से मैट्रि्क की शिक्षा पूरी की और इसके बाद वो अपनी आगे की पढ़ाई के लिए भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला ले लिया. घर से दूर रहने की वजह से उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी, जिसके बाद वो पोरबंदर वापस लौट गए.

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1888 में गए थे इंग्लैंड

इसके बाद 4 सितंबर 1888 को बापू इंग्लैड के लिए रवाना हुए. यहां जाते वक्त उन्होनें अपनी माता को वादा किया था कि वो मासाहारी भोजन से हमेशा दूरी बनाकर रखेंगे और उन्होनें वहां पर अपने इस वचन का पालन किया. हालांकि इसकी वजह से बापू को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा. शुरुआत में शाकाहारी भोजन नहीं मिलने की वजह से गांधी जी को कई दिनों तक भूखा रहना पड़ा. इसके बाद उन्होनें लंदन में वेजीटेरियन सोसाइटी की सदस्यता ग्रहण कर ली. 3 सालों तक यहां पर रहने के बाद वो साल 1891 में भारत वापस लौट आए.

13 साल की उम्र में हुई थी शादी

महात्मा गांधी की शादी साल 1883 में कस्तूबरा गांधी से हो गई थी, वो उस समय सिर्फ 13 साल के थे. दोनों की शादी माता-पिता ने तय की थी. लोग कस्तूबरा गांधी को प्यार से ‘बा’ कहकर बुलाते थे. वो गांधी जी से उम्र में एक साल बड़ी थी शादी से पहले उनकी पत्नी को पढ़ना लिखना नहीं आता था. गांधी जी ने उन्हें ये सब सिखाया. 1885 में गांधी जी के घर में बच्चे ने जन्म लिया, लेकिन कुछ समय बाद ही उसका निधन हो गया. इससे गांधी जी को काफी दुख पहुंचा था. इसके बाद दोनों के 4 और बेटे हुए.

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ऐसे हुई थी मौत

गांधी जी की मौत 30 जनवरी 1948 को हुई थी. इस दिन शाम 5 बजकर 15 मिनट पर जब गांधी जी दिल्ली के बिड़ला भवन में आयोजित प्रार्थना सभा में जा रहे थे, उस वक्त बीच रास्ते में नाथूराम गोडसे ने आकर उनके सीने पर एक के बाद एक तीन गोलियां दाग दी. जिनमें से 2 गोली तो उनके शरीर से होती हुई बाहर निकल गई, लेकिन तीसरी अटकी रही गई. इसके बाद महात्मा गांधी वहीं पर गिए गए.

महात्मा गांधी की हत्या के आरोप में 10 फरवरी 1949 को नाथूराम गोडसे को फांसी की सजा सुनाई गई थी और 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को फांसी पर लटकाया गया था. बताया जाता है कि इससे पहले भी गोडसे ने कई बार महात्मा गांधी की हत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन वो कभी कामयाब नहीं हो पाया.

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