मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर संभालेंगे कांग्रेस का प्रचार अभियान, MP में होगी टक्कर

Madhya Pradesh Bypoll election, Prashant Kishor Handle congree campaign

देश वैश्विक महामारी का रुप ले चुके खतरनाक कोरोना वायरस से लड़ रहा है। हर रोज कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। पिछले 24 घंटे में भारत में 6088 नए मामले सामने आए है और 48 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 118447 पहुंच गई है। उनमें से 48534 लोगों का सफल इलाज किया जा चुका है जबकि 3583 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, दूसरी ओर कोरोना संकट की इस घड़ी में भी राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी तेज हो गई है।

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मध्यप्रदेश में मात्र 15 महीने में ही सत्ता के सुख से वंचित होने वाली कांग्रेस पार्टी की नजर प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर टिकी हुई है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ काफी पहले से ही उपचुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने की बात कहते आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने उपचुनाव के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को सौंपा दिया है।

2018 विधानसभा चुनाव में थी अहम भूमिका

कांग्रेस पार्टी बीजेपी और पूर्व कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से बदला लेने के लिए प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। उपचुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान की रणनीति बनाने का काम प्रशांत किशोर  को दिया है। प्रशांत किशोर इससे पहले भी मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार रह चुके है।

साल 2018 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका थी। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभालने के लिए पार्टी ने तीन कंपनियों के प्रस्ताव पर विचार किया था। अंतत: अनुभवी प्रशांत किशोर के नाम पर ही मुहर लगी।

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ग्वालियर में होगा वार रुम

उपचुनाव में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए और बीजेपी पर हावी होने के लिए कांग्रेस का वार रुम भोपाल में न होकर ग्वालियर में होगा। कांग्रेस सिंधिया समर्थक विधायकों के सामने बेहद मजबूत प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रही है। खबर यह भी है कि सिंधिया समर्थक विधायक जो कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे। उपचुनाव में उन्हें बीजेपी की ओर से टिकट मिलने को लेकर भी संशय बना हुआ है।

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