क्या है PFI जिस पर हाथरस में जातिवाद दंगे के साजिश रचने का लगा आरोप? क्यों देश के लिए इसे माना जाता बड़ा खतरा?

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केरल का पॉपुलर संगठन POPULAR FRONT OF INDIA का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या को जातिवाद का नाम देकर दंगा कराने की साजिश में POPULAR FRONT OF INDIA का नाम एक बार फिर से सामने आया है। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब देश में धार्मिक या जातिवाद दंगें कराने के लिए POPULAR FRONT OF INDIA का नाम सामने आया हो।

पहले भी कई दंगों में आ चुका हैं नाम

इससे पहले भी फरवरी में हुए दिल्ली दंगे, सीएए के खिलाफ दंगा कराने की साजिश, बैंगलोर में हुए दंगों में भी पीएफआई का नाम सामने आया है। हालांकि इस संगठन के खिलाफ लगातार कहा जा रहा है कि ये देश में अशांति फैलाने के लिए लगभग सभी बड़े दंगों में फंडिंग करने में शामिल है। और आगे भी साजिश कर रहा है। पीएफआई 2006 से सक्रिय है और दक्षिण भारत में इसका खासा दबदबा है। इसके अलावा ये अब नॉर्थ ईस्ट और उत्तर भारत में भी सक्रिय होता जा रहा है। पीएफआई लगभग हर बड़े राजनैतिक और समाजिक मामलों में भाग लेता है।

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क्या हैं पीएफआई?

पीएफआई का गठन 2006 में केरल के कलीकट में हुआ था और इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में है। पीएफआई एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है जो समाज के पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों का भला करने की बात करता है। हालांकि इस्लामिक संगठन होने के कारण ये ज्यादातर इस्लामिक गतिविधियों में शामिल रहता है। इसकी ताकत का अंदाजा आप केवल इसी बात से लगा सकते है कि आज ये देश के 23 राज्यों में अपनी पकड़ बना चुका है। पीएफआई को साल 1997 में गठित सीमि यानि की student islamik movement of india का बी विंग कहा जाता है क्योंकि सिमी पर साल 2006 में बैन लगा दिया गया था जिसके तुरंत बाद ही पीएफआई का गठन किया गया।

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2012 से उठ रही हैं बैन करने की मांग

पीएफआई का विवादों से भी गहरा नाता रहा है और इस कारण पहली बार साल 2012 में पीएफआई को बैन करने का मांग हुई। लेकिन केरल सरकार ने खुद पीएफआई का बचाव किया था। उसके बाद से पीएफआई का नाम देश के लगभग सभी दंगों में शामिल होने के लिए, उनके लिए फंडिंग करने के लिए आता है, और इसलिए इसे बैन करने की मांग भी तेज है, लेकिन फिर भी इसे अभी तक बैन नहीं किया गया है। हालांकि हाथरस में जातिवाद दंगा कराने की साजिश के बाद क्या होगा सरकार का रूख पीएफआई को लेकर, ये वाकई में देखने वाली बात होगी।

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