साइकिल पर पिता को बैठाकर गुरुग्राम से दरभंगा पहुंची थी ये 15 साल की लड़की, अब मिला जिंदगी बदलने वाला बड़ा मौका!

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कोरोना संकट की वजह से देशभर में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूर समेत कई लोग अपने घर जाने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर पैदल करते हुए नजर आ रहे है. सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें लगातार वायरल हो रही है, जो लोगों को भावुक कर रही है. बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक लड़की खूब चर्चाओं में आई थी.

साइकिल पर तय किया था सफर

लॉकडाउन के बीच ज्योति नाम की एक लड़की अपने पिता को साइकिल पर बैठा कर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा लेकर गई थी. 8 दिनों में ज्योति ने एक हजार से भी ज्यादा किलोमीटर का सफर तय किया था. सोशल मीडिया पर ज्योति के जज्बे की हर किसी ने जमकर तारीफ की थी. इसके बाद अब हजारों किलोमीटर तक साइकिल से सफर करने वाली इस लड़की के हाथ एक बड़ा मौका लगा है.

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भारतीय साइकिलिंग महासंघ देगा बड़ा मौका

दरअसल, ज्योति के इस कारनामे से प्रभावित हुए भारतीय साइकिलिंग महासंघ उसको ट्रायल का मौका देने वाला है. भारतीय साइकिलिंग महासंघ के निदेश वीएन सिंह ने ज्योति को क्षमतावान करार देते हुए कहा कि उसको ट्रायल का मौका दिया जाएगा. अगर वो Cycling Federation of India के मानको पर थोड़ी सी भी खरी उतरती है, तो उसको स्पेशल ट्रेनिंग और कोचिंग दी जाएगी.

पिता मोहसन पासवान को साइकिल पर बैठाकर ज्योति रोजाना 100 से 150 किलो तक का सफर करती थी. वीएन सिंह ने भी ये बात मानी है कि 15 साल की इस बच्ची ने जो किया है, वो आसान काम नहीं है. वीएन सिंह ने कहा कि अगर उसने ऐसा किया है तो वो सचमुच काफी सक्षम है. उन्होनें आगे कहा कि महासंघ हमेशा ही टेलेंटड खिलाड़ियों की तलाश में रहता है, अगर ज्योति में ऐसी क्षमता है तो उसकी पूरी मदद की जाएगी.

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वीएन सिंह ने कहा कि सबसे पहले उसको परखा जाएगा. अगर वो हमारे मापदंड़ों पर सही साबित होती है तो उसकी मदद करेंगे. उसे ट्रेनिंग और कोचिंग शिविर में डाल सकते हैं. विदेशों से आयात साइकिल से उसकी ट्रेनिंग कराएंगे.

लॉकडाउन के बाद हो सकता है ट्रायल

भारतीय साइकिलिंग महासंघ के निदेशक ने कहा कि उन्होनें ज्योति से बात की थी और उसे कहा था कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद वो दिल्ली आए और इसके बाद उसका इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक छोटा सा टेस्ट लेंगे. हमारे पास वाटबाइक होती है, जो स्थिर बाइक है. इस पर बच्चे को बैठाकर 4 से 5 मिनट का टेस्ट किया जाता है. जिससे ये पता चलता है कि खिलाड़ी और उसके पैरों में कितन क्षमता है. अगर ज्योति इतने दूर तक साइकिल चलाकर गई है, तो उसमें निश्चित तौर पर काफी क्षमता है.

जानकारी के लिए आपको बता दें कि ज्योति के पिता गुरुग्राम में रिक्शा चलाने का काम करते थे. वो एक दुर्घटना का शिकार हो गए जिसके बाद ज्योति अपनी मां और जीजा के साथ वहां आ गई. पिता की देखभाल करने के लिए ज्योति गुरुग्राम में ही रुक गई. इसके बाद कोरोना संकट की वजह से देशभर में लॉकडाउन लागू हो गया और सारा कामकाज ठप पड़ गया. इन हालातों में ज्योति ने अपने पिता के साथ साइकिल पर ही गांव वापस आने का फैसला लिया.

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