क्या खतरे में हैं Whatsapp पर आपकी प्राइवेसी? चैट लीक होने के बाद उठ रहे हैं सवाल!

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सबसे फेमस मैसेजिंग ऐप व्हॉट्सऐप इन दिनों सवालों के घेरे में बनीं हुई है. सुशांत केस की जांच में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जांच में व्हॉट्सऐप चैट ने अहम भूमिका निभाई. NCB को व्हॉट्सऐप चैट के जरिए कई सुराग हाथ लगे, जिसकी आंच बॉलीवुड के कई बड़े-बड़े सितारों तक पहुंच गई. वहीं मीडिया चैनल्स ने भी व्हॉट्सऐप चैट शेयर कर इस केस से जुड़े नामों का खुलासा किया.

इसके बाद से हर किसी के मन में व्हॉट्सऐप पर प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़े हो रहे है. लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि क्या सरकार या फिर सेंडर, रिसीवर के अलावा भी कोई तीसरा मैसेज को एक्सेस कर सकता है?

क्या होता है एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन?

व्हॉट्सऐप अपने यूजर्स का डेटा सेफ होने का दावा एंड-टू-एंड एनकिप्शन के जरिए करता है. व्हॉट्सऐप पर इसका मतलब ये होता हैं कि कोई भी मैसेज केवल सेंडर और रिसीवर ही अपने ऐंड पर एक्सेस कर सकते हैं. कोई भी तीसरा व्यक्ति उन तक नहीं पहुंच सकता. हाल ही में ड्रग्स जांच में जिस तरह से पर्सनल चैट्स लीक हो रही है उसके बाद व्हॉट्सऐप ने अपनी बात को दोबारा दोहराया है. कंपनी की ओर से कहा गया है कि व्हॉट्सऐप अपने यूजर्स की पर्सनल चैट्स नहीं पढ़ता.

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व्हॉट्सऐप पर जो भी मैसेज, वीडियो या फिर कुछ भी भेजा जाता है, वो पूरी तरह एनक्रिप्टेड हैं. जब कोई शख्स आपको मैसेज भेजता हैं तो वो एक कोड में बदल जाता है और उसे रिसीवर को दोबारा मैसेज की शक्ल में दिखाई देता है. इस दौरान कोई ‘थर्ड पार्टी’ मैसेज को एक्सेस नहीं कर सकती. थर्ड पार्टी का मतलब किसी ऐप, सर्विस और अटैकर से होता है. व्हॉट्सऐप भी इस दौरान आपके मैसेज एक्सेस नहीं कर सकता. लेकिन सेंडर और रिसीवर के डिवाइस के कोई और इन मेसेजेस तक पहुंच सकता है. जिसका मतलब ये है कि एनक्रिप्शन अपना काम कर रहा है, लेकिन मैसेजेस की सेफ्टी की गारंटी नहीं होती.

क्लोनिंग के जरिए बढ़ता है खतरा

किसी यूजर के मैसेज को पढ़ने या फिर डेटा चुराने का सबसे आसान तरीका उसकी पहचान चोरी करना होता है. व्हॉट्सऐप को अगर ये लगेगा कि आप सेंडर या रिसीवर में से कोई एक हैं, तो एनक्रिप्शन के बावजूद मैसेजेस पढ़े जा सकते हैं. वहीं इसके लिए क्लोनिंग भी एक तरीका हो सकता है. किसी यूजर की पहचान चुराने के बाद उसका डेटा दूसरे डिवाइस पर कॉपी किया जा सकता है. बिना फोन को छुए भी ऐप्स के जरिए उसकी पहचान को चोरी किया जा सकता है. इससे क्लोन यूजर की तरह पर्सनल अकाउंट एक्सेस किया जा सकता है. वहीं इसके अलावा चैट्स का बैकअप एनक्रिप्टेड नहीं होता, जो पर्सनल मैसेज लीक होने की वजह बन सकता है.

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नहीं होता Whatsapp पर कोई पॉसवर्ड

व्हॉट्सऐप पर अकाउंट बनाने के लिए केवल एक मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. मोबाइल नंबर पर मैसेज के जरिए यूजर की पहचान को वेरिफाई किया जाता है. दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तरह व्हॉट्सऐप यूजर्स को पासवर्ड रखने का ऑप्शन नहीं देता. व्हॉट्सऐप में ऐसा नहीं होता कि एक पासवर्ड के जरिए ही आप अपना अकाउंट लॉग-इन कर सकते है. इसका मतलब है कि अगर किसी यूजर का नंबर क्लोन कर लिया जाता है, तो उसका अकाउंट बनाया जा सकता है और किसी भी पुराने चैट का बैकअप होने पर उसको रिस्टोर किया जा सकता है.

ऐसे में क्या करना चाहिए?

जो हाल ही में देखने को मिला है, जिस तरह ड्रग्स जांच में व्हॉट्सऐप चैट्स लीक हुए हैं, उससे लोगों को अपनी प्राइवेसी का डर सता रहा है. ऐसे में आपको ऐप पर मिलने वाले सभी ऑथेंटिकेशन और सिक्यॉरिटी ऑप्शंस को ऑन रखना चाहिए. व्हॉट्सऐप पर जो भी मैसेज भेजे जाते हैं उनको दो सिरों पर एक्सेस किया जा सकता है और इसके अलावा इन्हें कोई नहीं पड़ सकता. अटैकर या फिर हैकर मैसेज पढ़ने की कोशिश कर सकते हैं, ऐसे में अपने फोन और ऐप को प्रोटेक्टेट रखना जरूरी है. आपको ऐप लॉक और फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन के जरिए भी व्हॉट्सऐप पर जरूर ऑन रखना चाहिए.

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