पुरानी किताब करें दान: IPS अधिकारी की इस नेक पहल के बारे में जानकर आप भी करेंगे उन्हें सलाम!

suraj singh parihar

आप अपनी पुरानी और नहीं इस्तेमाल होने वाली किताबों का क्या करते हैं? वो किताबें जिनको लोगों की जरूरत नहीं होती, वो उसे या तो कबाड़ी को बेच देते हैं, या फिर वो घरों में पड़े पड़े धूल खा रही होती है। आपके लिए भले ही वो किताब महज रद्दी हो, लेकिन किसी वो किताब किसी की जिंदगी बना सकती है। आपकी पुरानी किताबों से किसी का सपना पूरा हो सकता है।

IPS ने शुरू की बुक बैंक की मुहिम

अपने नेक काम के लिए अक्सर ही सुर्खियों में रहने वाले IPS सूरज सिंह परिहार ने एक बार फिर से सराहनीय पहल की है। उन्होनें गरीब छात्रों के लिए बुक बैंक की शुरुआत की। खुद उत्तर प्रदेश के जौनपुर के गरीब परिवार में जन्मे अपनी कड़ी मेहनत UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की। वो अब ऐसे ही अनेक लोगों के सपने पूरी करने की कोशिशों में जुटे हुए है। आपको बता दें कि सूरज सिंह परिहार 2015 IPS बैच के अधिकारी हैं।

सोशल मीडिया के जरिए सूरज सिंह परिहार लोगों से अपनी पुरानी और नई किताबे दाने करने की अपील कर रहे हैं। उनके इस नेक काम में कई लोग आगे आकर सपोर्ट कर रहे हैं।

सोशल मीडिया के जरिए चला रहे मुहिम

सूरज सिंह परिहार ने कुछ महीनों तक इस अच्छी मुहिम की पहल की थीं। इस दौरान उन्होनें एक पोस्ट करके लिखा लोगों से अपील करते हुए अपनी पुरानी पुस्तक जिनका इस्तेमाल नहीं करते, उनको दान करने को कहा था। उन्होनें UPSC के साथ साथ SSC, Bank PO, MBA, स्कूल, कॉलेज सभी की किताबें दान करने को कहा था। इसके साथ ही उन्होनें एक पता भी शेयर किया, जिस पर लोग नई पुरानी किताबे भेज सकते हैं।

book bank ips

जानिए कौन हैं IPS सूरज सिंह परिहार?

ऐसा पहली बार नहीं जब IPS सूरज सिंह परिहार इस तरह का नेक काम कर रहे हो। इससे पहली भी वो कई बार अपने अच्छे कामों को लेकर सुर्खियों में आ चुके हैं। खुद सूरज सिंह परिहार ने काफी मेहनत करने के बाद अपने IPS बनने को पूरा किया। उनका ये सफर संघर्षों से भरा रहा। साल 2000 में उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर.नारायणन के हाथों क्रिएटिव राइटिंग और कविता के लिए बाल श्री अवार्ड से नावाजा गया था।

छोटे से परिवार में जन्मे सूरज सिंह परिहार देश की सेवा करना चाहते थे। उनका सपना IPS बनने का था। आर्थिक स्थिति के चलते उन्होनें कॉल सेंटर में भी जॉब की। उन्होनें इस जॉब को छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन 6 महीनों में ही उनकी सारी सेविंग खत्म हो गई। जिसके बाद सूरज सिंह परिहार ने बैंक में भी जॉब की। 2012 में एसएसंहसी सीजीएल की परीक्षा में उनका सेलेक्शन हो गया। जिसके बाद उन्होंने कस्टम और एक्साइज इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली।

इसके साथ ही वो सिविल सर्विस की तैयारी में भी जी जान से जुटे रहे। तीसरे प्रयास में वो अपने सपने को पूरा करने में कामयाब हुए। ट्रेनिंग के बाद उनको रायपुर में एसपी सिटी नियुक्त किया गया। वहां अच्छे कामों को देखते हुए प्रमोट किया और फिर पोस्टिंग नक्सली प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में हुईं। वहां उन्होनें युवाओं को जागरूक करने के लिए एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई, जिसका नाम था ‘नई सुबह का सूरज’। वो अक्सर ही समाज के लिए कई नेक काम करते रहते हैं।