Bihar Elections 2020: 15 साल से हैं नीतीश कुमार और पासवान के बीच “36 का आंकड़ा”, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी?

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बिहार इस समय चुनावी रंग में रंग चुका हैं. बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही सभी पार्टियां मैदान में उतरने के लिए एकदम तैयार हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक बार फिर से सियासी उठापठक देखने को मिल रही हैं. दल बदलते हुए देखे जा रहे हैं. इन चुनावों में सत्ताधारी एनडीए के गठबंधन में भी फूट पड़ गई हैं. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया हैं.

अकेली चुनावी मैदान में उतरेगी LJP

इस बार विधानसभा चुनाव में LJP अकेले चुनाव लड़ती नजर आएगी. LJP को बीजेपी से तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार और JDU से काफी समस्याएं है. LJP अध्यक्ष चिराग पासवान खुले तौर पर नीतीश कुमार की आलोचनाएं करते अक्सर नजर आए हैं. इसी वजह से पार्टी ने तो “बीजेपी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं” नारा तक दे दिया है. इसी के चलते पार्टी एनडीए के गठबंधन से अलग हो गई.

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतीश कुमार और LJP के रिश्तों में इतनी खटास क्यों हैं. इसकी शुरुआत अभी से नहीं हुई हैं, बल्कि ये 15 साल पुरानी बात हैं. जी हां, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान के बीच दूरियों की शुरुआत तो साल 2005 से हो गई थी.

साल 2005 के चुनावों का हैं ये किस्सा

दरअसल, 2005 के फरवरी-मार्च के महीने में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए थे. इन चुनावों से पहले ही रामविलास पासवान ने वाजपेयी सरकार से इस्तीफा देकर अपनी अलग पार्टी लोक जनशक्ति (LJP) बना ली थी. इसके बाद वो अकेले ही चुनावी मैदान में उतर गए. उस दौरान JDU और बीजेपी लालू परिवार को सत्ता से हटाने की मुहिम में जुटी हुई थी. नीतीश कुमार ये चाहते थे कि इसमें रामविलास पासवान भी साथ दें, जिससे उनकी मुहिम को ताकत मिले. लेकिन पासवान राजी नहीं हुए. वो अकेले ही चुनाव में उतरे.

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इन चुनावों में पासवान की पार्टी का प्रदर्शन बढ़िया रहा और वो 29 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब हो गए. इन चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. चुनाव के नतीजे आने के बाद नीतीश कुमार ने एक बार फिर से रामविलास पासवान को साथ लाने की कोशिश की, लेकिन पासवान अपनी जिद्द पर अड़े रहे. उन्होनें तो किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री की मांग रखकर सियासी समीकरण को ही बदल दिया था, जिसके लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ.

जिद्द पर अड़े रहे पासवान, फिर हुए चुनाव

चुनाव खत्म हुए, नतीजे आ गए, लेकिन बिहार में सियासी उठापटक चलती रही. ऐसी भी खबरें आने लगी कि LJP के 23 विधायक टूटकर नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं. हालांकि इन खबरों का खंडन करते हुए नीतीश कुमार ने ये साफ तौर पर कह दिया कि वो किसी भी तरह की तोड़फोड़ करके सरकार नहीं बनाएंगे.

ऐसा माना जाता हैं कि यहीं से इन दोनों के बीच में दूरियां आना शुरू हुई. पासवान अपनी जिद्द पर अड़ रहे, जिसके चलते राज्य में कोई भी सरकार नहीं बना पाया. जिसके बाद मजबूरन अक्टूबर-नंवबर में मध्यावधि चुनाव कराने पड़े. इन चुनावों में पासवान की पार्टी को नुकसान का सामना करना पड़ा. इन चुनावों में LJP केवल 10 ही सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हो पाई. इस दौरान बीजेपी और JDU गठबंधन ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए.

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