राममंदिर के आगे अयोध्या की इन 10 जगहों को भी कमतर मत समझिएगा, चाह कर भी हटा नहीं पायेंगे नजरें

कई सालों के इंतजार के बाद अयोध्या में 5 अगस्त को रामलला के भव्य मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है. आपको बता दें कि रामनगरी अयोध्या में आकर्षण का केंद्र सिर्फ राममंदिर ही नहीं बल्कि ये बेमिसाल जगह भी हैं.

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कई सालों के इंतजार के बाद अयोध्या में 5 अगस्त को रामलला के भव्य मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है. श्रद्धालु न जाने कब से इस पल की आस लगाये बैठे हुए थे. अजीब विडंबना है कि सैंकड़ों साल बाद जब ये सपना हकीकत में तब्दील होने जा रहा है तो भी एक सपना ही प्रतीत हो रहा है. आने वाली 5 अगस्त की तारीख एतिहासिक पन्नों में दर्ज होने वाली है. इस आयोजन में खुद पीएम मोदी भी शरीक होंगे. जिसके लिए बड़े स्तर पर अभी से ही तैयारियां शुरू हो गई हैं. अयोध्या नगरी के कोने कोने को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. आगामी सालों में ये मंदिर भारत के पर्यटक स्थलों में शुमार हो जाएगा. लेकिन आपको बता दें कि रामनगरी अयोध्या में आकर्षण का केंद्र सिर्फ राममंदिर ही नहीं बल्कि ये बेमिसाल जगह भी हैं.

सरयू तट

धार्मिक ग्रन्थ रामायण में अयोध्या में लहलहाती सरयू नदी का काफी सुंदर तरीके से वर्णन किया गया है. पूरा अयोध्या ही इसी तट पर बसा है. कुछ समय पहले ही इस तट का कायाकल्प किया गया है जिसमें हजारों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने आते हैं. हरिद्वार में बसी हर की पौड़ी की तर्ज पर इस तट पर बने घाटों को राम की पौड़ी भी कहा जाता है.

हनुमानगढ़ी

राम मंदिर के बाद जिस जगह के नाम से अयोध्या शहर जाना जाता है वो हनुमानगढ़ी है. ये शहर के बीचो बीच बसा हुआ है. यहां घूमने वाला हर व्यक्ति राम मंदिर के बाद हनुमान गढ़ी का दीदार करने जरूर जाता है. श्रीराम के सेवक हनुमान के इस विशाल मंदिर की मान्यता है कि अयोध्या आने वाले हर व्यक्ति को सबसे पहले इस मंदिर में बजरंगबली के दर्शन करने चाहिए. उसके बाद ही उन्हें दूसरे मंदिर जाना चाहिए.

दन्तधावन कुंड

हनुमान गढ़ी में बने कुंड को दन्तधावन कुंड के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि श्री राम सुबह इस कुंड के जल से अपने दांत साफ़ करते थे.

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राजा मंदिर

सरयू तट में नहाने वाले लोग यहां पर स्थित कई मंदिरों के दर्शन भी करते हैं. यहां पर स्थित राजा मंदिर की वास्तुकला की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. इस मंदिर की कलाकृति और बनावट आपको आश्चर्य की दुनिया में ले जाने के लिए काफी हैं. यहां का माहौल नदी के किनारे होने के चलते काफी अद्भुत रहता है.

श्रीराम मंदिर कार्यशाला

श्रीराम मंदिर को बनाने के लिए अयोध्या में एक कार्यशाला का निर्माण किया गया है. यहां विशाल पत्थर रखे गए हैं जिसमें सुंदर नक्काशी की गई है. अयोध्या आने वाला व्यक्ति इस कार्यशाला में इस उत्सुकता के चलते आता है ताकि उसे राम मंदिर में होने वाले निर्माण की एक हिंट मिल जाए.

राजा दशरथ का महल

ये महल भी शहर के बीच मौजूद है. श्रीराम के पिता राजा दशरथ का ये महल काफी प्राचीन और भव्य है. बताया जाता है कि प्रभु राम का बचपन इसी महल में बीता था. यहां के परिसर में भारी संख्या में जमा होकर श्रद्धालु भजन और कीर्तन गाते हैं.

दिगंबर जैन मंदिर

इसे भी अयोध्या के पवित्र तीर्थों में से एक कहा जाता है. दिगंबर जैन मंदिर के बारे में मान्यता है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्म भी अयोध्यानगरी में यहीं हुआ था.

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ऋषभदेव की भव्य प्रतिमा

दिगंबर जैन मंदिर में ही स्वामी ऋषभदेव की बड़ी प्रतिमा स्थापित है. ये रायगंज में मौजूद है और करीब 31 फीट इसकी ऊंचाई है. जैन लोगों की आस्था का प्रतीक कहे जाने वाले इस मंदिर की मूर्ति का दीदार करने बड़ी संख्या में लोग आते हैं.

कनक भवन

कनकभवन अयोध्या के उत्तरपूर्व में बना हुआ है और अपनी अनोखी कलाकृति के लिए प्रसिद्ध है. इस विशाल मंदिर के बारे में ये मान्यता है कि श्री राम से विवाह होने के बाद ये मंदिर माता सीता को उपहार में दिया गया था.

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सीता की रसोई

जैसा कि नाम से प्रतीत होता है कि ये जगह उस दौरान माता सीता की रसोई का स्थान हुआ करता था. जो अब मंदिर में तब्दील कर दिया गया है. इस मंदिर के कोने में एक रसोई घर का मॉडल भी बना हुआ है जहां पुराने बर्तन रखे हुए हैं.