भूमि पूजन को लेकर काउंटडाउन शुरू! पूरा होने जा रहा है राम मंदिर आंदोलन से जुड़े इन चर्चित चेहरों का सपना

काफी संघर्षों और आंदोलनों के बाद आखिरकार राम नगरी अयोध्या फिर खिलखिला उठी है. पांच अगस्त को लेकर रामलला के शहर में काउंटडाउन शुरू हो चुका है.

ram mandir protest heroes

काफी संघर्षों और आंदोलनों के बाद आखिरकार राम नगरी अयोध्या फिर खिलखिला उठी है. पांच अगस्त को लेकर रामलला के शहर में काउंटडाउन शुरू हो चुका है. इस मंदिर के बनने में बीजेपी के अलावा नेता, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोग, तमाम हिंदू संगठन, संत समाज, और तमाम आंदोलनकर्ताओं की मेहनत और लड़ाई शामिल है. राममंदिर के नींव की पहली ईंट रखे जाने के साथ ही इन सभी का सपना हकीकत में बदल जाएगा. बता दें कि ऐसे कई लोग थे जिन्होंने देश में राम लहर पैदा की थी. इनमें से कई चर्चित आन्दोलनकारी पंच तत्व में विलीन हो गए तो कई इस सपने को हकीकत में बदलते हुए अपनी आंखों से देखेंगे. आइये जान लेते हैं कौन हैं वो चर्चित हस्तियां.

लालकृष्ण आडवाणी

राम मंदिर निर्माण में रामलहर पैदा करने वाले शख्स आडवाणी ही थे. इस लड़ाई को आंदोलन का प्रारूप देने में लालकृष्ण आडवाणी ने अहम भूमिका निभाई थी. इस आंदोलन के जरिये आडवाणी ने बीजेपी की ताकत बढ़ाने का काम किया. साथ ही सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा पार्टी के लिए तुरुप का इक्का साबित हुई थी. आडवाणी को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने में आरोपी माना गया था. फ़िलहाल अभी वो राजनीति से दूर हैं.

कल्याण सिंह

जिस दौरान बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था, उस दौरान यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह थे. तो जाहिर था ढांचा विध्वंस की आंच कल्याण सिंह पर भी आई. उनकी सरकार सत्ता से बर्खास्त कर दी गई. हालांकि पद से हटने के बाद वे लगातार मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे. बाद में भी उन्हें यूपी का सीएम बनाया गया. ये उनके राम मंदिर से जुड़ाव का ही नतीजा था कि उन्हें मोदी सरकार में पहला राज्यपाल बनाया गया. फ़िलहाल इस समय वे राजनीति में नहीं हैं.

उमा भारती

राम मंदिर आंदोलन के दौरान साध्वी उमा भारती ने जनसभाओं में भाजपा की मुख्य वक्ता की भूमिका निभाई. साल 1990 और फिर 1992 में हुए आंदोलनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही थी. ढाचा विध्वंस के मामले में उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था. फिर मोदी सरकार में उन्होंने केंद्रीय मंत्री का पद संभाला. अभी वे राजनीति में सक्रिय नहीं हैं.

मुरली मनोहर जोशी

भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक कहे जाने वाले मुरली मनोहर जोशी की भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका थी. उन पर भी ढांचा विध्वंस का काला धब्बा लगा था. उनका भी मौजूदा समय में राजनीति से कोई लेना देना नहीं है.

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हाशिम अंसारी

हाशिम अंसारी साल 1949 से ही बाबरी मस्जिद के प्रमुख पैरोकार रहे थे. इनकी पहले साइकिल और फिर दर्जी की दुकान थी. इन्होने 1961 में बाबरी मस्जिद के लिए सुननी वक्फ बोर्ड की ओर से दायर किये गए मुकदमे पर आवाज उठायी थी. उनकी राम मंदिर के पैरोकार परमहंस रामचंद्र दास से दोस्ती हमेशा चर्चा में रही. 95 साल की उम्र में उनका 20 जुलाई 2016 में निधन हो गया.

सैयद शहाबुद्दीन

सैयद शहाबुद्दीन को भी बाबरी मस्जिद के मुख्य पैरोकारों में से एक माना जाता है. ये पहले भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी थे, उसके बाद ये राजनेता बने. शहाबुद्दीन तीन बार सांसद रह चुके हैं. इन्होने मस्जिद निर्माण के लिए बाबरी मस्जिद कोऑर्डिनेशन कमेटी भी बनायी. उन्होंने तत्कालीन पीएम राजीव गांधी से मुलाकात कर बाबरी मस्जिद मुसलमानों को सौंपने की मांग की थी.

अशोक सिंघल

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अशोक सिंघल संघ के अनुषांगिक संगठन विहिप के मुखिया रहे हैं. इनकी भी राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका माना जाती है. इनकी अगुवाई में अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में विराट हिंदू सम्मलेन, शिला पूजन, दिल्ली में धर्म संसद हुआ था. इन्हीं सब ने राम मंदिर आंदोलन को नई धार दी. अशोक को ढांचा विध्वंस मामले में भी आरोपी बनाया गया था.

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महंत रामचंद्रदास परमहंस

हिंदू पक्ष के महंत रामचंद्र दास परमहंस 1949 में विवाद शुरू होने से लेकर 1992 में बाबरी ढांचा विध्वंस के दौरान केंद्रीय भूमिका में रहे. ये कई सालों तक हिंदू महासभा से जुड़े रहे. इसके अलावा परमहंस 1989 में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष भी बनाए गए. इन की अध्यक्षता में ही जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ था. 2003 में अंतिम समय तक परमहंस राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करते रहे.