जून के अंत तक 80 फीसदी मजदूर कर चुके होंगे पलायन, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

कोरोना लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की हालत ‘न घर के न घाट के’ जैसी हो गयी है। उनका काम धंधा सब चौपट हो गया है जिस वजह से अब उन्हें खाने के एक एक निवाले के लिए तरसना पड़ रहा है।

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कोरोना लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की हालत ‘न घर के न घाट के’ जैसी हो गयी है। उनका काम धंधा सब चौपट हो गया है जिस वजह से अब उन्हें खाने के एक एक निवाले के लिए तरसना पड़ रहा है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद इस वजह से उनका पलायन नहीं रुक रहा है। सरकार द्वारा चलायी गयी बसों और ट्रेनों के अलावा लोग सैंकड़ों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके पैदल, साइकल या फिर ट्रक से ही घर की ओर निकल पड़े हैं। केंद्र का कहना है कि देशभर के चार करोड़ प्रवासी श्रमिक अलग अलग कार्यों में लगे हुए हैं। और लॉकडाउन के बाद 75 लाख लोगों को ट्रेनों और बसों से उनके घर की ओर भेजा गया है। फिलहाल इसमें पैदल यात्रियों की संख्या शामिल नहीं है। इसका हिसाब लगाया जाये तो करीब 20 फीसदी प्रवासी अपने घर पहुंच चुके हैं। लेकिन अगर पलायन का सिलसिला यहीं नहीं थमा तो जून के अंत तक करीब 80 फीसदी प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके होंगे। इससे देश में रोटी, कपड़ा और मकान की नयी चुनौती खड़ी हो जाएगी।

कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं

अभी तक देश में प्रवासी मजदूरों का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक देश में कुल 45.36 करोड़ प्रवासियों की संख्या है। ये देश की कुल आबादी का 37 फीसदी है जिसमें पलायन करने वाले लोग भी शामिल हैं।

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यूपी- बिहार के सबसे ज्यादा प्रवासी

लॉकडाउन के चलते रेहड़ी पटरी वालों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। अनुमानों की मानें तो अंतरराज्यीय प्रवासियों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर हैं। इनकी संख्या 25 और 14 फीसदी है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का नंबर आता है। इसका अर्थ है कि करीब उत्तर प्रदेश के 40 से 60 लाख लोग घर वापसी चाहते हैं। जबकि बिहार का ये आंकड़ा 18 से 28 लाख है, इस कड़ी में राजस्थान में 7 से 10 लाख और मध्य प्रदेश में 6 से 7 लाख लोग घर जाना चाहते हैं।

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उत्तर प्रदेश में 21 लाख श्रमिक आए घर

अब तक उत्तर प्रदेश में श्रमिकों को लेकर 1018 ट्रेनें आ चुकी हैं। इन ट्रेनों से 13 लाख 54 हज़ार से ज्यादा प्रवासी कामगार घर लौटे हैं। अगर इसमें बस और अन्य संसाधन भी जोड़ दिये जायें तो ये संख्या करीब 21 लाख पहुंच जाती है। इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश के करीब आधी प्रवासी घर पहुंच चुके है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक मई से 2,600 से अधिक श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं।